Saturday, March 21, 2020

इश्क़ का हर पन्ना छिपा सा है ......

यूं तो हर फिज़ाओं में हमने इश्क़ को देखा है , कभी हसते , कभी नाचते , कभी अटखेलियां करते देखा है । 
ऐसी अनेक हरकत करते दिख जाता है , यह इश्क़ ।
 जो कभी हंसाता है , गुदगुदाता है , सताता है तो कभी कभी मायूस भी कर जाता है । 
और इस इश्क़ को  , देखना , पाना , और महसूस करना , हम और आप , एक ना एक बार जरूर चाहते है । 
और क्यों ना चाहे , आखिर ये इश्क़ , इतना खूबसूरत जो है । 
अब इस इश्क़ के रूप भी तो बहुत है ..,
 खूबसरत होने के साथ साथ , ये ज़िद्दी भी तो बहुत है , मासूम भी बहुत है , और साथ के साथ हमारे लिए खास भी तो बहुत है । 
ये इश्क़ है जनाब , बीना हम आपके , फैल भी तो नहीं सकता , सुन भी नहीं सकता और बोल भी तो नहीं सकता , ओर तो ओर हर उम्र में होता है , हर शख्स को होता है  ।
ये इश्क़ , छोटा - बड़ा , अमीर - गरीब , गांव - शहर , देश - विदेश , उच - नीच , इच्छा - सम्मान नहीं देखता ।
यह तो हर जगह , हर रंग में चढ़ता है , फूलों की तरह महकता है , हर वक़्त , कोई ना कोई गीत गुनगुनाता है ।
यह इश्क़ है साहब हम और आप को मिलकर रहना और जीना सिखाता है ।
यह इश्क़ वकालत भी खुद करता है , और फैसले भी खुद सुनता है । 

 लेकिन इन दिनों बागो से , वो दिलकश , मन को जीत लेने वाले , हवाओं में ख़ुशबू बिखेरने वाले , खूबसूरत फूल गायब है । जो इस इश्क़ का ख्याल रखते है ।
सुना है , इन फूलों को परेशान करने , दुनिया के हर बाग़ में , एक चोर आया है , जो इन फूलों को इश्क़ करने नहीं देना चाहता , इनको खुलकर महकना और खिलखिलाकर हंसते , देखना नहीं चाहता । 
इसीलिए , बागो के हर  , बागवान ने ,...., 
अपने - अपने बागो के हर फूल को छिपाना और उनपर निगरानी रखनी शुरू कर दी है । ताकि, उस चोर से अपने बाग़ के सभी खूबसरत फूलो को बचा सके , जिसे वह चोर नुकसान पहुंचाना चाहता है । 
क्यूंकि हर बागबान जानता , इन फूलों से फैलने वाले इश्क़ का महत्व , रंगो का महत्त्व , खुशबू का महत्व , और  खुद का इन खूबसरत फूलो के बिना , रहने का महत्व ।
वह जानता है , हर फूलो में शामिल , उसके पत्ते , डाली , मिट्टी और पानी का महत्व ।  
वह बागवान समझता है अपनी बैचैनी में , छिपी हैरानियो का महत्व  । या यूं कहो वह समझता है फिज़ाओं में इश्क़ के , ना होने का महत्व ।
वह सेहमा हुआ सा है ,  लेकिन अपने जिक्र में बेतहाशा फिक्र करता हुआ , नज़र आता है ।  
वह जानता है ........
इन दिनों इश्क़ का हर पन्ना , शांत है । जिस इश्क़ के पन्ने को पढ़कर , सब , सब कुछ बोल दिया करते थे  , आज उनके मुंह पर पट्टी सी लगी है । 
आंखे कहना और हाथ रोकना चाहते है बहुत , आंखो पर पहरा और हाथो पर सख्ती बड़ी है । 
अब यह इश्क़ बोलता नहीं , चलता नहीं , हंसता नहीं  पहले जीतना । शांत अकेले में बैठकर, बस यही चाहता है  कि वह चोर , बागो के फूलो को ना चुराए , ना नुकसान पहुंचाए और हमेशा के लिए उसके बाग को छोड़कर चला जाए । 
क्यूंकि ...,जिस इश्क़ के मनमानियों के शोर थे , फिज़ाओं में , आज वह मान सा गया है। 
उसके खिलखिलाते चहरो ने भी , गंभीरता को समझ , उसकी अंजानी सी सिलवटों को खुदमें समेट सा लिया है । 
जीस इश्क़ के फैसले के बाद सुनवाइयों की जरूरत नहीं हुआ करती थी , आज उस इश्क़ ने अपनी , परछाईं को भी चादर में ओढ़ सा लिया है ।
क्यूंकि ये इश्क़ रहना चाहता है , जीना चाहता है हमेशा... हम और आप में ।
यह जानता है अपने ज़िंदगी का हर वो हसीन लम्हा , जिसके लिए वह छिप रहा है । 
यह आना चाहता है , 
दुबारा खिलखिलाकर हसना चाहता है , 
उस खोफ़ के चादर को जलाकर , जिसने उसे छिपा लिया है खुद में  । 
बस अपने बाग को , जिसकी खूबसूरती उसके हसीन  फूलो से है उसको,  उस चोर से बचना है ।
फिर , यह इश्क़ भी  मुस्कुराते हुए लौट आएगा ।




Monday, February 24, 2020

बस की मनपसंद सीट , और अफसोस

भारत में बस का सफ़र , यकीनन बहोत ही खूबसूरत होता है । अब बात चाहे long journey की हो या फिर शहर गांव के सफ़र की । दोनों ही सूरत में ये सफ़र और भी खबसूरत हो जाती है , जब आपको अपनी मनपसंद  सीट मिल जाती है।
फिर आपको वह सब चीज अचानक ही सुन्दर और अदभुत लगने लगती है , जिसका आपके वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नहीं है ।
अब वह फिर चाहे Driver के बजते मनपसंद गाने हो , या फिर कंडक्टर के द्वारा लगाई जाने वाली आवाज़ या फिर उसका शोर । आप सब Enjoy ,कर रहे होते हैं । 
कुछ इसी तने बने में बुनी यह कहानी है l
तो आइए Alter Ishq की ये कहानी पड़ते है , उम्मीद है आपको पसंद आएगी । 

गांव का एक अल्हड़ लड़का , शहर आकर दो साल से काम कर रहा था । के अचानक उसके परिवार में उसके शादी की बात की चर्चा शुरू हो जाती है । और इस वजह से उसको रिश्ते की बात को आगे बढ़ाने के लिए गांव जाना पड़ता है । 

वह इस ख़बर के बाद खुश बहोत था , मानो अपनों से मिलने की उसकी व्याकुलता साफ साफ उसके चहरे पर देखी जा सकती थी ।  
चहरे पर मुस्कान , बातो में बचकानापन और  आंखो में चमक , साफ साफ उसकी इच्छाओं को प्रकाशित कर रही थी । 
उसे शहर से अपने गांव जाना था , सो उसने अपनी टिकट एक बस से करवाई , और अपनी पनपसंद सीट  ( जो हम आप की अक्सर होती हैं )  Window वाली ली और अपनी सीट पर उस दिन समय से पहले पहोच कर अपनी सीट पर बैठ गया । 
उस वक़्त बस की अधिकतर सीटें खाली थी । वह वक़्त से पहले को पहोंच जो गया था ।  धीरे धीरे बाकी पैसेंजर भी आने लगे ।
उसके मन में कल्पनाओं भाव उठने लगा ।  और दिमाग में सौ विचार , उछल कूद करने लगे ।  उसको ये फिक्र सता रही थी कि उसके साथ वाली सीट  पर कौन आएगा । 
के अचानक एक बेहद ही खूबसूरत लड़की उस बस के गेट से अंदर आती है और उस लड़की को देख , लड़के की पलके झुकना भूल जाती हैं । आंखे उसी को निहारने लगतव हैं, और दिल दिमाग बस यही सोच रहा होता है कि... बस वो उसके साथ वाली सीट उसकी हो । 
वह लड़की उसके पास आती है और सीट नंबर कन्फर्म करती है , लेकिन वह 3 4 सीटों का ज़िक्र करती है । तो दिमाग तैनात हो जाता है और उसके आस पास खड़ी उसकी family को भी देखता है । जिसमे उसका  भाई  और माता पिता  भी शामिल थे ।  जिनको उसकी आंखो ने देखने से इंकार सा कर दिया था ।
ख़ैर उनको देख दिमाग इत्मीनान से उनको सीट की डिटेल बताता है और खुद को तसल्ली देते हुए , बस के गेट की तरफ देखने लगता है ।
बस आगे चलने लगती हैं और वह लड़का , खूबसरत वादियों , नदियों , खेतो  , फसलों  और अपनी यादों का लुफ्त लेने लगता है । अपनी विंडो सीट का वह पूरा आनंद ले रहा होता है कि अचानक बस एक स्टॉप पर आकर रुकती है । 
और आंखे फिर उस बस के गेट पर चली जाती है । 
इस बार फिर एक खूबसरत लड़की बस में चढ़ती है और आकर, उस लड़के के आगे वाली सीट पर अंकल जी के साथ बैठ जाती है ।  
उस लड़की को देख,  उस लडके का मन अपने साथ में बैठे बूढ़े पर नाराज़ सिर्फ इसलिए होता है कि उन्हें भी उसी स्टॉप पर उतरना होता है । और वह कंडक्टर को आवाज़ देर से देते है । 
मन एक घने अफसोस के बदलो से गुजर जाता है । 

बूढ़े के उतारने के बाद बस चलती हैं , और वह लड़का  उस लड़की को देखते हुए , अपनी शादी को लेकर , खुशनुमा यादों में खो जाता है । 
क्या होगा, कैसा होगा ऐसे अनगिनत सवालों से उसका दिमाग़ लड़ने लगता है । 
पर मन ही मन वह अपनी सीट से ज्यादा , उस अंकल की सीट को महत्व देने लगता है  जिसके साथ वाली सीट पर वह खूबसरत लड़की बैठी थी । 


Tuesday, February 18, 2020

अनजानी सी गलती ...

हम आपकी जिंदगी में खुशियां का महत्व उतना ही हैं जितना फूलों में, महकती खुशबू का । इसी महकती खुशबू को जीने के लिए हम और आप अक्सर अपनों से हंसी मज़ाक करते हैं , जो हमारे भीतरी मन को गुदगुदाते है और हमारे मुख पर , प्यारी सी मुस्कान छोड़ जाते हैं ।

लेकिन कुछ पल ऐसे है , जो प्यार मोहब्बत और अपनेपन से भरे , इन खुबसूरत लम्हों को उदास कर जाते हैं ! और छोड़ जाते हैं अपनों के चहरे पर वो मायूसी , जो हम-आपको भी सताती है ।

कुछ ऐसी ही कहानी हैं , जहां ये Ishq बहुत चमकदार तो है पर अचानक इस Ishq की चमक धुंधली पड़ जाती हैं । और बनाती हैं Ishq की एक ऐसी कहानी , जो इस खुबसूरत Ishq को Alter बनाती है ।

तो शुरू करते हैं Alter Ishq की इस कहानी को , आशा करते हैं आप पसंद करेंगे ।

फरवरी महीने की बीतती सर्दी के बीच , शादी का ताना-बाना बुना जा रहा था , कहीं बेहतर पकवान बन रहे थे तो कहीं साजो सामान का ख्याल रखा जा रहा था और इसी के साथ-साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा भी काफ़ी खुबसूरती से अपने पंख फैला रहा था । 

और ऐसे में,  हंसी मज़ाक से भरी बातों को करते,  बच्चों का एक झुंड , काफ़ी खिलखिला रहा था , जिसको देख , उस घर के बड़े भी अपनी भागीदारी , समय-समय पर दे रहे थे । 
सब बहोत खुश थे और खुब हंस रहे थे ।

माहौल बेहद ही खुशनुमा था , लेकिन उस झुंड में बैठी एक लड़की अचानक मायूस हो जाती है , और अपनी दोनों आंखों को नम कर , वहां से उठ बाहर चली जाती है । 

ऐसे में , पूरा माहौल शांत पड़ जाता है , और सबकी निराश नजरें , उस एक लड़के को निहार रही होती हैं जो कुछ देर पहले तक तो बहोत , बातूनी था , और इस बेहद खूबसूरत पलों का , एक खुबसूरत हिस्सा था ।
पर अब वह बिल्कुल नि:शब्द था । 

इतना शांत था , जैसे बंजर भूमि बिना फसल के दिखाई देती है । उसकी आंखें मानो , मौका तलाश रही थी इस बंजर भूमि को भिगोने का । 
 उसके लब उस लड़की से , अपने को निर्दोष कहना तो बहोत चाहते थे लेकिन उसकी ओर उठी नज़रों ने , उसके लबों , मानो कोई इजाज़त नहीं दी , कुछ भी बलने की।
 
लड़की की भीगी आंखें , उस लड़के के मन को हर वक्त तोड़ रही थी । और उसके चेहरे पर निराशा , के बादल छोड़ रही थी । 
उसे अपनी गलती का एहसास तो था , पर लड़की की आंखों से निकले आसूंओं और अपनो के चहरो पर आई निराशा का , उसको ज्यादा ख्याल था ।

थोड़ा वक्त बीतता है और वह लड़का , घर के द्वार पर बैठ ,  अपनी गलती के बारे में सोचता है ।  कि तभी  उस लड़की का फोन उसके फ़ोन पर आता है , और उसके द्वारा अनजाने की गलती को  , वह लड़की समझ , उसको दोशी नहीं बनाती है । 
उस लड़के के नि:राश मन , थोड़ा शांत होता है । 
और उस लड़की से अपनी बात , खुद के लबों से बोलने के बाद । उसका मन फिर मुस्कुराता है । और घर का 
माहौल फिर से खुशनुमा हो जाता है और सब बेहद खुश नज़र आते हैं। 

पर कहीं न कहीं , कुछ फासले ,अब दूरियों में बदलते नज़र आ रहे थे‌ उसे । 
जिससे उसका मन , अब भी एक सवाल में उलझा रहता है । कि .........
क्या,  वास्तव में उस लड़की ने, उसको माफ़ किया या नहीं ।







Friday, February 7, 2020

मुझे उससे मिलना था ...

वक़्त की करवटों के साथ , कहानियों का संग्रह होना लाज़िमी हैं । कहानियां जिसमें खुबसूरत यादों के , फूलों को पिरो , उसको एक माला का आकार दिया है । 
कुछ ऐसी ही खुबसूरत यादों का , एक सुन्दर सार है यह कहानी ।  जिनमें रोज़ की बातों से ज्यादा , उन नटखट , सुन्दर और आकर्षक पलों को बताया है , जिसमें ये कहानी बसती है , तो आईये शुरू करते हैं , ALTER ISHQ की ये कहानी , आशा है आपको पसंद आएगी .....!!

दुध सी सफेद , गर्मी का वो दिन,  जब वो पहले दफा , हमारे गली में खाली पड़े जमीन को देखने , अपने परिवार संग आई थी ।  और मैं उसी गली में दोस्तों के साथ कंचे खेलता हुआ  , उसको देख , देखते ही रह जाता हूं । 
8- 10 साल की उम्र में यह कैसा आकर्षण था जो बयान नहीं हो रहा था ।  जुबां तो कुछ कह नहीं रही थी , और आंखें किसी और से बोलना नहीं चाहती थी ।
 खैर जमीन का वो खाली हिस्सा उसकी Family खरिद लेती है । पर अपना घर,  वो 10-12  साल बाद उस खाली,  खरिदी जमीन पर बनवाते हैं । इंतजार के 10-12 साल बाद वो एक बार फिर से , मुझे दिखाई देती है ।
इस बार भी उसको देख , वहीं रुक जाने का दिल किया । इन ढूंढ़ती आंखों को बहोत बातें करनी थी उससे और लबों को तो मानो इन्कार कर दिया था कुछ कहने से ।
लेकिन उम्र के इस पड़ाव में , पैरों को चाहकर भी रोक ना सका , बदनाम ना हो जाऊं कहीं इन आंखों की मनमानियों से , इसलिए खुद को बहोत जल्दी रूकसद करना पड़ा ।  
माना एक अरसा गुज़ारा है इन आंखों ने खामोशियों में , पर बात भी तो ,अपनी गली की थी । 
फिर भी दिल ना जाने क्यों बहोत खुश था । शायद वो समझ बैठा था,  कि घर तो अब बनवा लिया है, तो कभी ना कभी मुलाकात तो होगी । और दिल को शायद इस बात की काफ़ी खुशी थी , कि 10 - 12 साल बाद ही सही , अब वो इन आंखों के पास तो रहेगी । 
लेकिन वह घर उन्होंने बनवाकर , किरदार को किराए पर दे दिया । 
और करीब 5-6  साल बाद,  उसका पूरा परिवार,  अपने घर में रहने के लिए आए ।
पर इस बार परिवार में सब तो दिख रहे थे , पर मन जिसको देख कर मिलना चाहता था , वो नहीं दिख रहा था । आंखें मानो बेचैन सी हो गई थी । लबों को इशारा तो बहुत किया , केहने को । लेकिन घबराईए आंखों से कुछ बोला नहीं जा रहा था ।
काफ़ी समय बाद लबों ने , हरकत दिखाई , तो उसकी शादी की बात सामने आई ।

उस दिन मैंने खुद से बेहद बातें की , खुद की गलतियां खोजी । 
आंखों को आईने के पास लेजाकर , उन आंखों से खुद को कई बार देखा । पर कुछ ख़ास जवाब , खुद से मिला नहीं ।
खैर यूं तो , 
मिलकर उससे , मुझे बहुत कुछ कैहना था ।
बीते इस लम्बे इन्तज़ार को , 
उसके चुनर में जड़ें , उस मोती सा छोटा करना था ।
हां , मुझे उससे मिलना था ....!!

Saturday, December 14, 2019

एक दोस्ती ऐसी भी,,,

" दोस्त " एक शब्द है , जिंदगी में आने वाले पहले अंगड़ाई का । जिसके साथ से,  ये जिंदगी सुलझने लगती है । और इस जिंदगी में मिठास घोलने लगती है। 
लेकिन कुछ जगह ये दोस्ती उलझ सी जाती है, और कड़वा सी कर देती हैं , इस जिंदगी को।
कुछ ऐसी ही कहानी है इस Alter Ishq की , जहां उलझी उलझी सी है दोस्ती , और उलझे उलझे हैं वो सब ।
तो आइए पढ़ते हैं , "एक दोस्ती ऐसी भी " ।
एक शहर , जिससे दूर एक कस्बा बस्ता है , जिसमें कुछ जिंदगियां ,खुद से जीने का , संघर्ष कर रही हैं । 

इन्हीं जिंदगी में से दो जिंदगी निकल आती है , इस शहर मे , जहां लोगों के बीच दूरियां बहुत है , लेकिन फिर भी सब मिलकर रहने की कोशिश करते हैं ।
हां इसी शहर में ,जहां ये शहर बोलता तो नहीं पर कभी कभी चिखता ज़रुर है । 

तो इस शहर में , यश और मानसी भी अपनी अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने आते हैं । क्योंकि वो मानते थे कि शहर हमारे कस्बे से काफ़ी बेहतर और खुबसूरत है , शहर में सब से रहते हैं , अच्छा पढ़ते हैं, बड़ी बड़ी गाड़ी में सवारी करते हैं , और अच्छे पैसे कमाते हैं , ऐसे ना जाने कितने उम्मीदों को लेकर , वो दोनों भी शहर आये थे ।
यश का स्वभाव अच्छा था और पढ़ाई भी अच्छी की थी तो यश को नौकरी जल्दी मिल जाती है , लेकिन मानसी यश के विपरित थी । इसलिए शहर में मानसी को सफलता नहीं मिल पा रही थी। लेकिन यश ने मानसी का साथ नहीं छोड़ा था और उसको अपने घर में रहने के साथ-साथ , उसकी मदद भी करता था । 
वक्त के साथ साथ , मानसी और यश एक दूसरे के बहोत अच्छे दोस्त बन गए थे और एक दूसरे से अपनी सारी बात करते थे ।
एक दिन मानसी बेहद निराश बेठी थी और खुद से बेहद परेशान भी थी ।  तो यश केहता है , देख मानसी अब ना तो तेरे पास पैसे बचे हैं और ना ही तुझको तेरे मुताबिक कोई काम मिला है ।  अगर तु , बोले तो मैं अपने Office में बात करूं , अब तो मुझे भी काफ़ी वक्त हो गया है और उनको नये Staff  की भी जरूरत है । मानसी को नौकरी में कोई दिलचस्पी नहीं थी , लेकिन हालात बिगड़ते देख उसने नौकरी के लिए मनाया खुद को , और यश के साथ नौकरी करने लगी , और धिरे धिरे यश को पसंद करने लगी थी लेकिन यश इन सबसे अनजान था । और इधर यश भी किसी को चाहने लगा था और वो भी उसी Office  में थी पर वो मानसी नहीं थी। 
मानसी को यश का किसी के पास जाना , उसके पास किसी भी लड़की का आना , अब पसंद नहीं आ रहा था । मानसी यश को लेकर बहोत गम्भीर हो गयी थी । 
और यश अभी अनजान था मानसी की गम्भीरता को लेकर जो कि अब एक सनक बन चुकी थी शायद । 
एक दिन यश ने अपनी बात मानसी से बताई , कि वो और सपना एक दूसरे को पसंद करते हैं और हमने एक दूसरे के परिवार से भी बात कर ली है , जल्द ही हम दोनों एक हो जाएंगे , पिता जी भी जल्दी शहर आ रहे हैं । 
मानसी को ,  ये बातें सुनकर गुस्सा आ जाता है और वो अपने कमरे में चली जाती है , और अपने सपनों को फिर से टुटता देख , वो एक ग़लत फैसला कर जाती है । 
और रात के खाने में ज़हर मिलाती है । 
यश खाना खाने के बाद हमेशा के लिए शांत हो जाता है और मानसी उस शांत पड़े यश पर , देर रात तक , चिखती है - चिल्लाती है और अंत में खाने का बचा हिस्सा , वो भी खाकर , हमेशा के लिए सो जाती है ।

उस रात भी यह शहर चीखा और देर सुबह तक इसका शोर शहर के हर हिस्से में बना रहा और फिर ये शहर शांत हो गया ।











Monday, December 2, 2019

हां मैं लड़की हूं ....

मेरे , घर में आने पर , 
आज भी कुछ आंखों में खुशी नहीं आती हैं 
और चेहरे पर ऐसे भाव दिखाई देते है, मानो 
कोई समझौता सा किया हो ख़ुद से ।
समस्याओं कि एक ऐसी पहेली में फस जाते ये सब, जिसका जवाब मैं , हर वक्त , हर जगह , और हर शब्द में देती हूं । 
जिन्दगी को छिनना और इस छिनी गई जिंदगी को , जीकर बताना , ऐसी ज़िद्द मैं बरसों से करती आई हूं ।
मैं लड़ती हूं , बीखरती हूं , टूटतीं और संवरती भी हूं 
पर हार जाने से , मैं आज भी बहुत डरती हूं ।
हां मैं लड़की हूं , जो हर वक्त बदलती आई हूं। 

लेकिन आज मेरी लड़ाई ओर अधिक बढ़ गई है । शायद मेरी ज़िद्द ने मुझे , बहोत ताक़तवर बना दिया है ।
क्योंकि किसी एक की औकात नहीं , जो मुझसे जीत सके , सब झुंड में ही आते हैं, और वो भी तीर कमान लिए ।
और नहीं होती हिम्मत जो मेरे मुंह पर बोल सके , सहम जाते हैं सब , अपनी छोटी बात लिए ।

पर मुझे अभी और शक्तिशाली बनना है , कि
झूक जाए वो नज़रें , जो मुझे हर तरफ घूरती है , 
खत्म हो जाऐ वो वहशीपन, 
जो मुझे घूरते वक्त , उनकी सोच बनती हैं ।
यूं तो हर उम्र में लड़ती आई हूं और लड रही हूं ।
लेकिन फिर भी पुछ बेठती खुद से ‌, कि

किस उम्र में खेलूं कूदू , या पढू क़िताबें खोल के , 
बाबूल के आंगन में ही डसते , कितने काले लोग रे। 

ऐसी बहुत सी कहानी है मेरी , जिनमें मैं कमजोर लगती हूं । मुझे लड़ना है और अपने हर सवाल का जवाब जानना है , जैसे कि,,
चौदह दिन का छोटा पौधा, क्यों तुने खिलवाड़ किया ।
दो महीने सींचा फिर से, क्यों टेहनी पर वार किया ।
चार साल तक बचती आई ,क्यों पत्ता पत्ता तोड़ लिया।
सात साल में लड़कर मर गई, क्यों बारह में उखाड़ दिया।
१३, १५, १७, २६ हर उम्र में , क्यों विनाश किया ।
कैसी है हैवानियत तुझमें , कि
मरने के बाद भी, मेरा शिकार किया ।
लेकिन, 
एक दिन वो भी आएगा जब मैं , इन सब सवालों का जवाब लूंगी और तेरी हैवानियत खड़ी जल जाएगी ।

तब मैं किसी से मदद नहीं मांगूंगी , मोमबत्ती नहीं जलवांउगी , शोर नहीं मचवांउगी बल्कि  
मैं भी तुझे  जिंदा वहीं जलाऊंगी और बेपनाह चिल्लाऊंगी ताकि तेरी चिख़ भी ना सुन ले कोई , 
मैं ऐसा तांडव मचाऊंगी ।

मत भूलो मैं वो लड़की हूं 
जिसने बंद दरवाजों से हवाओं का सफर किया है ।
तुम्ही को पाल , तुमको कांधे तक किया है ।
मैंने नदियों से , समंदर का रास्ता तय किया है ।
और सबसे जरुरी बात, तुमको पैदा तक किया है ।

अगर जाग गई हैवानियत मुझमें( लड़की )
तो क्या तुम कर पाओगे , 
पैदा होना तो दूर , पनप तक ना पाओगे ।

हां मैं लड़की हूं ।












Monday, November 25, 2019

Shadi Ke Baad

Sabse Bacha Kar Ke , Mene Izzat Bacha Ke Rkhi Hai... Aksar Yehi Sochte Hai , Ek Ladki Ke Mata-Pita ... 
Lekin Iss Baat Ki Ehmiyat , Ladki Ke Shaadi Ke Baad , Yaa Toh Kam,  Yaa Fir Khatm Ho Jati Hai... Aur Shadi Ke Baad Woh Ladki Kisi Aur Ki Ho Jati Hai..  Lekin..
Kabhi Sochta Hun, Toh Uljh Jata Hun , Khud Ke.. Angint Sawalo Me.. 
Mujhko Uljha Dete Hai , Woh Laad , Pyaar , Izzat Aur Uske Sath Bitaya Gya Woh Lamba Waqt Jo Shyad , Us Ladki Ke liye Bahot Hi Khubsurt Hua Karte "The".  
Bas Issi "The"  Se Parrshan Hun... Yeh "The" , "Hai"  Kyu Nhi ? Yaa Hamesha Aisa Hi Rahega Kabhi Badlega Nhi... Aisa Kyu Nahi... 
Khair Mere Swalo Ka Jawab , Shayad Ho Aap Ke Paas , Par Me Sahmti Nhi De Pta Apni Pta Nhi Kyu.. Kyuki Mujhe Mile Jawab Mujhe Aur Uljha Dete Hai. 
Khair...
Aatey Hai ... Apni Kahani Par... 
Shaadi Ke Baad...  Jahaan Hum Aksar Pyaar Kaa Har , Chehra Badal Dete Hai.. 
Yaa Yunn Keh De , Bahot Saare Naye Chehre Jod Lete Hai.. 
Aisi Hi Kahaani Hai.. Jahnaa Ishq Itne Saare , Loge Ke Bich Ghutney Lgta Hai..
 
Toh Shuru Karte Hai... Umeed Hai Aap  Pasand Karenge.....Iss Alter Ishaq Ko... 

Ke Ladki , Jiska Naam Riya Shah Tha..
Lekin Shadi Ke Baad Uska Naam , Riya Sharma Ho Gya Tha..  Woh Shuru Se Hi Apne Name Me Badlaaw Nhi Chahti Thi.. 
Woh Chahti Thi , Ki Uski Identity Change Naa Ho.. Jiski Baat Woh Apne Husband Se Bhi Kehti Thi.. Lekin Husband's Uski Baato Ko Sunkar Ansuna  Kar Deta Tha...
Husband's Ki Family Me Sab Usko Pasand Karte The.. Lekin Riya Ab Khud Ko Pasand Nahi Kar Rahi Thi... Kyuki Woh Jaanti Thi Ki , Yhaan "Riya Sharma " Ko Pasand Kiya Jaa Rha Hai , Naa Ki "Riya Shah" Ko.
Uski Yeh Soch, Waqt Ke Sath Aur Badhti Jaati Hai... Kyuki Kabhi Usko Tarif Milti To , "Sharma" Ke Sath Usko Judna Pdta Tha.. Aur Koi Galt Kehta Toh "Shah" Ke Sath..
Jaisa ki Uske Sath , MA Ke Results Ke Sath Hua.. Riya Ne MA , Achhe Number Se Pass Ki Thi ... Toh Padosio Ko Bhi Khabr Mili.. 
Woh Bhi Badhaayi Dene , Ghar Aaye , Tab Saas Ne Bada Hi , Garw Mehsusu Krte Hue Kaha.. Are "Sharma" Khandaan Ki Bahu Hai "Sharma".
MA Hone Ke Baad Riya Job Karna Chahti Thi..  Lekin Yhaan Family Ka Kehna Tha..
Sharma Khaandan Me Ladkiya Naukri Nhi Karti Hai..  "Shah" Logo Me Hota Hoga.. 
Tum Job Bhul Jao..
Ab Riya Khud Ko Thga Hua Saa Mehsus Kar Rahi Thi... 
Samay Ke Sath , Responsibilities Badhti Hai, Toh Dikkte Parehsaniyaa Samne Aati Hai.. Kuchh financial To Kuchh Roz Marra Ki Baate... 
Iss Waqt Par , Riya Sharma Ne Fir Job Ki Baat Ki... Iss Baar Virod Utna Nhi Hua .. Or Naa Hi Shah Family Ki Baat Hui... 
Aur Riya Sharma Ko Job Jo Izzazt Mil Gyi.. 
Riya Ko Ek Achhi Company Me Job Mil Gyi... Joki Usse Sasur Ke Friend Ki Thi ... Ye Baat Riya Ko Nhi Pta Thi Aur Naahi Uski Sharma Family Ko.. 
Job Milne Ke Baad , Usne Family Ko Btaya , Toh Family Ko Khushi Hui.. Lekin Jab Pta Chala Riya Ke Sarur Ke Friend Ki Company Hai Toh.. Baate Bhi Bahot Hui.. 
Jinme Se Ek Thi..Uske Husband's Ki.. 
Are Uncle Ne Sharma Dekhte Hi Rakh Liya Hoga , Akhir Woh Bhi "Sharma" Hai...
Riya Tum Agar "Shah" Hoti To Mushkil Hota Tumko.. 
Aur Tumhare CV Me Mera Naam Bhi Toh Hai... Uncle Se Me Kayi Baar Mila Hun.. 
Mera Naam Unko Yaad Hoga Hi... 
Unhone Meri Yaa Papa Ki Baat Ki Thi , Kya Tumse...
Riya Mn Hi Mn Muskurai , Aur Khud Ko Samjhane Lgi... 
Ki.. Itna To Me Samjh Gyi.. 
Sharma Aur Shah Ke Iss Kashmakash Ko Yhan Samjhna Mushkil Hai , 
Sahi Aur Behtr Me Kewal Sharma Ki Wajah Se Hun. Akhir Me  Sharma Family Ki Bahu Jo Hun.
Aur Naa Chahte Huye Bhi Woh Ek Bar Fir Muskurai.. 
Kyuki Woh Janti Thi... Ki Woh Akeli Nhi Hogi... Aur Bhi Riya , Khud Ko Talash Rahi Hongi....Ki Akhir Woh Kab "Shah"Hai Yaa Fir Kab "Sharma"..